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शब्द संग्रह: १०

क्या सुनाऊं? क्या बताऊं?
मन में मेरे क्या है।
दिव्य ज्योति या कमल कलश है,
कैसी ये? बस कथा है ।

गिनती हैं। अनगिनत मेरे,
भूकन से बना, ये संखा है।
टूटी हैं, जिनकी पंखुड़ियां,
दुख की ये व्यथा है।

सुख दुख के इस कीर्तन में,
संख ध्वनि धमकता है।
धूमिल रंग हैं, अनगिनत जिसमें,
फिर क्यूं मन बहक्ता है।

By AuthorParmar

लेखक✍🏻

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