" प्रसंग: ०९"

अजब समस्या, शीतल मन में,

दृग से दृश्य कुछ दिखता है ।

देखना भी न चाहता, तनिक मन मेरा,

फिर क्यों अनल दहकता है।


अनल शीतल विलोम अर्थ है,

बिप्रिथार्थक है, मन मेरा ।

नहीं चाहता, कश्मा काश हो,

ये क्षण भर का जीवन मेरा ।


इस चार दिनों के जीवन में,

बहुत विफल रहा है, पथ मेरा।

कोई तो है इंतेज़ार में,तभी रुका है, पथ मेरा ।।