शब्द-संग्रह-०७

तीन वर्ष का, हुआ जगत में ।

लोग हुए तब । हितकारी ।

विकल दृष्टि । समय की आयी ।

पड़ी आ विपदा भरी ।


अरे ! नवजन्म है । इस जीवन तो!

करो कार्य हितकारी ।

नवकलाओं से नवरचना करो भी,

बनो जगत आधिकारी !


पाकर जन्म । तुम इस जगत में,

श्रिणिप्राण हो गए हो ।

क्या-क्या न दिया इसने ?

फिर क्यूँ? प्राणभक्त सोये हो ।


विनीत

राम रंजन कुमार