शब्द-संग्रह-०४

स्वर उठता है। राम कथन से,

सतयुग के सिता से ।

स्वर उठता हनुमन्त के,

राम भक्त प्रणेता से ।


मैं अपनी बिंदु, प्रारम्भ करूँ ।

जग में रचना आरम्भ करूँ ।

स्वर सुरु । शब्द से हो मेरे ।

जनगणना प्रारम्भ करूँ ।


जब होश आया । इस जीवन में,

लहरों की पवन से,

दृश्य प्रफुल्लित, दिखा सुनहरा ।

लोग दिखे तन मन से ।

विनीत

राम रंजन कुमार