शब्द संग्रह:-०२

एक भी शब्द न मेरा,

रचनाकारों की रचना है यह!

एक भी पद न मेरा,

ईश्वर की संरचना है यह!

तो पढ़ लो। यह रचना तुम भी,

ताकि रच लो साम्राज्य यहाँ।

क्यूँकि पुनः स्थापित होगा,

उनका महासाम्राज्य यहाँ ।

किस विस्मय में? जी रहे!

अहंकारों की बूँद से ।

एक ओस की बूँद भी,

कहीं ज़्यादा है। उन बूँद से।


विनीत

राम रंजन कुमार